उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं की सुरक्षा और उनके परिवारों के भविष्य को लेकर एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो भ्रष्टाचार की जड़ों पर सीधा प्रहार करेगा। दरअसल, उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद अब ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ (UP Mukhyamantri Krishak Durghatna Kalyan Yojana) को पूरी तरह डिजिटल बनाने जा रहा है। 12 जनवरी 2026 को लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह साफ़ हो गया है कि फरवरी 2026 तक इस योजना का पोर्टल पूरी तरह अपडेट हो जाएगा, जिसके बाद किसानों को ₹5 लाख की सहायता राशि पाने के लिए तहसील या लेखपालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यही कारण है कि आज प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में इस ‘डिजिटल कवच’ की चर्चा हर तरफ है। वास्तव में, अब तक कई प्रक्रियाएं भौतिक सत्यापन (Physical Verification) पर टिकी थीं, जिसकी वजह से किसान परिवारों को मुआवजे के लिए महीनों इंतज़ार करना पड़ता था। लेकिन अब, एनआईसी (NIC) की मदद से विकसित हो रहे आधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए आवेदन से लेकर लाभ वितरण तक की हर कड़ी ‘फेसलेस’ और ‘पेपरलेस’ होगी। चलिए, इस विशेष और प्रभावशाली रिपोर्ट में समझते हैं कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना 2026 का नया ढांचा क्या है और किसानों के अन्य बड़े सवालों (जैसे पीएम किसान और यमुना एक्सप्रेस-वे मुआवजा) पर क्या अपडेट है।
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डिजिटलीकरण 2026: क्या बदलेगा किसानों के लिए?
राजस्व परिषद के अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सचिव एसपी गोयल ने इस योजना को समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन करने के निर्देश दिए हैं। इसके परिणामस्वरूप, अब किसानों को निम्नलिखित बड़े फायदे मिलेंगे:
- पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक: वास्तव में, बिचौलियों का हस्तक्षेप शून्य हो जाएगा और लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में पहुंचेगा।
- समय की बचत: आवेदन की स्थिति (Status) को मोबाइल से कभी भी ट्रैक किया जा सकेगा।
- दस्तावेज अपलोड: अब सभी जरूरी प्रमाणपत्र ऑनलाइन पोर्टल पर ही अपलोड होंगे, जिससे फाइलों के गुम होने का खतरा नहीं रहेगा।
29,394 किसानों की जगी किस्मत: मण्डलवार रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2019 में शुरू की गई इस योजना ने अब तक हजारों परिवारों को टूटने से बचाया है। दिसम्बर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में लगभग 29,394 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
प्रमुख मण्डलों में स्वीकृत आवेदनों की स्थिति:
| मण्डल (Region) | स्वीकृत आवेदन |
|---|---|
| लखनऊ | 3,569 |
| गोरखपुर | 3,143 |
| अयोध्या | 2,491 |
| कानपुर | 2,436 |
लिहाजा, यह आंकड़े गवाही देते हैं कि सरकार की यह योजना धरातल पर मजबूती से काम कर रही है।
मुआवजे का गणित: ₹5 लाख तक का सुरक्षा कवच
योजना के तहत उत्तर प्रदेश के किसानों को दुर्घटना से मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक मदद दी जाती है:
- मृत्यु होने पर: ₹5,00,000 (5 लाख रुपये)
- 60% से अधिक दिव्यांगता: ₹2,00,000 (2 लाख रुपये)
- 100% दिव्यांगता: ₹5,00,000 (5 लाख रुपये)
प्रभावी रूप से, इस योजना का लाभ 18 से 70 वर्ष की आयु के उन सभी किसानों को मिलता है जिनका नाम खतौनी में दर्ज है या जो बटाईदार के रूप में खेती कर रहे हैं।
लोग यह भी जानना चाहते हैं (User Queries Answered)
Q1. किसान योजना के ₹2000 कब मिलेंगे?
दरअसल, पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त नवम्बर 2025 में भेजी गई थी। नियमानुसार, हर 4 महीने में किस्त आती है, इसलिए 22वीं किस्त फरवरी 2026 के मध्य तक किसानों के खातों में आने की प्रबल संभावना है। अपनी ई-केवाईसी (e-KYC) अपडेट रखें वरना पैसा अटक सकता है।
Q2. यमुना एक्सप्रेस वे का 64 प्रतिशत में किसान का काम मिलेगा?
वास्तव में, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने किसानों को उनकी जमीन के अधिग्रहण के बदले 64.7% अतिरिक्त मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार ने इसके लिए बजट आवंटित कर दिया है और जिन किसानों ने अपनी सहमति दे दी है, उनके बैंक खातों में पैसा भेजा जा रहा है। यह किसानों के लंबे संघर्ष की बड़ी जीत है।
Q3. यूपी के किसानों का कर्ज माफ हुआ कि नहीं?
परिणाम स्वरूप, वर्तमान में सरकार का पूरा फोकस ‘ऋण समाधान’ और ‘ब्याज माफी’ योजनाओं पर है। 2017 में हुई बड़ी कर्ज माफी के बाद, अब सरकार समय-समय पर बैंक सेटलमेंट (One Time Settlement) के जरिए राहत दे रही है। हालांकि, नई सामूहिक कर्ज माफी की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है।
विकिपीडिया इंस्पायर्ड फैक्ट्स: उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद की स्थापना 1831 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुई थी। यह प्रदेश का राजस्व संबंधी मामलों का सर्वोच्च न्यायालय है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का सफल संचालन इसी परिषद की देखरेख में होता है। अधिक आधिकारिक विवरण के लिए आप Revenue Board UP पोर्टल पर विज़िट कर सकते हैं।
निष्कर्ष: अन्नदाता की खुशहाली ही डिजिटल इंडिया का लक्ष्य
अंत में, यह समझना आवश्यक है कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना 2026 का डिजिटलीकरण केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह उन गरीब किसान परिवारों के प्रति संवेदनशीलता है जो मुसीबत के समय सरकारी दफ्तरों में भटकते थे। ₹5 लाख की यह मदद अब केवल एक क्लिक की दूरी पर होगी। अतः, अपनी खतौनी और आधार कार्ड को अपडेट रखें ताकि योजना का लाभ लेने में कोई अड़चन न आए। जागरूक रहें और सरकार की इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का ऑनलाइन पोर्टल कब तक शुरू होगा?
राजस्व परिषद के अनुसार, पोर्टल के अपडेशन का कार्य जारी है और इसे फरवरी 2026 तक पूरी तरह डिजिटल रूप से लाइव कर दिया जाएगा।
Q2. योजना के तहत आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
वास्तव में, आवेदन के लिए आधार कार्ड, खतौनी की नकल, निवास प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक और दुर्घटना से संबंधित एफआईआर या पोस्टमार्टम रिपोर्ट (यदि लागू हो) अनिवार्य होगी।
Q3. क्या बटाईदार किसानों को भी ₹5 लाख मिलेंगे?
जी हाँ, योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि खतौनी में नाम न होने पर भी यदि बटाईदार किसान के पास वैध साक्ष्य है, तो वह इस योजना का पूर्ण लाभ उठा सकता है।
Q4. आवेदन की स्थिति कैसे ट्रैक करें?
लिहाजा, फरवरी 2026 के बाद किसान अपने ‘एप्लीकेशन आईडी’ के जरिए नए पोर्टल पर कभी भी अपने आवेदन की स्वीकृति की स्थिति जांच सकेंगे।
h3. Q5. योजना का लाभ लेने की अधिकतम आयु सीमा क्या है?
परिणाम स्वरूप, 18 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक के किसान इस योजना के तहत कवर किए गए हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी वर्तमान मीडिया रिपोर्ट्स और राजस्व परिषद की बैठकों के आधार पर है। योजना के नियमों और पोर्टल की आधिकारिक लॉन्च तिथि में सरकार द्वारा बदलाव किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट (bor.up.nic.in) पर विज़िट करें। www.slmuniversity.org किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि के लिए उत्तरदायी नहीं है।



