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बजट 2026 और 8वें वेतन आयोग का आधिकारिक आगाज
नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट ने न केवल देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय की, बल्कि देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के चेहरों पर भी मुस्कान ला दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026 में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और स्पष्ट संकेत मिला है।
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सरकार ने बजट में 8वें वेतन आयोग के कामकाज और प्रशासनिक खर्चों के लिए एक अलग ‘बजट लाइन’ बनाकर यह साफ कर दिया है कि अब वेतन और पेंशन में संशोधन की प्रक्रिया केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। यह कदम कर्मचारियों के उस लंबे इंतजार को खत्म करने वाला है, जो पिछले एक साल से आयोग के गठन और फंड को लेकर कयास लगा रहे थे।
1. बजट 2026: 8वें वेतन आयोग के लिए फंड का आवंटन
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) की ‘डिमांड फॉर ग्रांट्स’ (Demands for Grants) में पहली बार ‘8वें केंद्रीय वेतन आयोग’ के नाम से एक समर्पित बजट प्रावधान देखा गया है। यह तकनीकी रूप से बहुत बड़ा बदलाव है, क्योंकि किसी भी आयोग के लिए बजट में अलग से फंड रखना उसकी सक्रियता की आधिकारिक पुष्टि होती है।
फंड का पूरा गणित:
सरकार ने बजट 2026-27 में 8वें वेतन आयोग के लिए कुल ₹23.42 करोड़ का प्रावधान किया है। इस राशि का वितरण इस प्रकार किया गया है:
- राजस्व व्यय (Revenue Expenditure): लगभग ₹21.32 करोड़। यह राशि कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और दैनिक प्रशासनिक कार्यों के लिए खर्च होगी।
- पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): लगभग ₹2.10 करोड़। यह राशि दफ्तर के बुनियादी ढांचे, कंप्यूटर और अन्य संपत्तियों के निर्माण पर खर्च की जाएगी।
यह पैसा कहाँ खर्च होगा? यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह ₹23.42 करोड़ कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का पैसा नहीं है, बल्कि उस आयोग (Commission) को चलाने का खर्च है जो सैलरी बढ़ाने की सिफारिशें तैयार करेगा। इसमें विशेषज्ञों की टीम, रिसर्च डेटा जुटाना, देश भर के विभिन्न विभागों का दौरा करना और प्रशासनिक अमले का वेतन शामिल है।
2. पिछले 1 साल का घटनाक्रम: कागज से ऑफिस तक का सफर
8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर पिछले एक साल में कई महत्वपूर्ण मोड़ आए हैं। नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि यह प्रक्रिया किस तरह धीरे-धीरे आगे बढ़ी है:
| तारीख | क्या हुआ? |
|---|---|
| 15 जनवरी 2025 | आयोग के गठन की पहली आधिकारिक घोषणा हुई। |
| 28 अक्टूबर 2025 | आयोग के गठन का आधिकारिक ऐलान किया गया। |
| 3 नवंबर 2025 | आयोग का ‘टर्म ऑफ रेफरेंस’ (ToR) जारी हुआ, जो काम का दायरा तय करता है। |
| 20 जनवरी 2026 | 8वें वेतन आयोग को अपना आधिकारिक दफ्तर मिला। |
| 28 जनवरी 2026 | चीफ विजिलेंस अधिकारी (CVO) की नियुक्ति हुई, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे। |
| 01 फरवरी 2026 | बजट में ₹23.42 करोड़ का फंड आवंटित कर दिया गया। |
3. सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा: क्या होगा बदलाव?
बजट में फंड मिलने का सीधा मतलब है कि सरकार अब गंभीरता से सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करने जा रही है। आमतौर पर वेतन आयोग निम्नलिखित मानकों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करता है:
- महंगाई (Inflation): पिछले 10 वर्षों में बढ़ी हुई महंगाई और जीवनयापन की लागत।
- फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था। कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 3.68 करने की मांग कर रहे हैं।
- न्यूनतम वेतन (Minimum Wage): वर्तमान में न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, जिसे बढ़ाकर ₹26,000 या उससे अधिक किए जाने की संभावना है।
- पेंशन संशोधन: पेंशनभोगियों के लिए बेसिक पेंशन और फैमिली पेंशन के फॉर्मूले को सरल और अधिक लाभकारी बनाना।
4. कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया: “मिशन 200 दिन” की मांग
बजट में फंड मिलने के बाद कर्मचारी यूनियनों में उत्साह है, लेकिन साथ ही वे प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग भी कर रहे हैं। ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने इस पर अपनी तीखी लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
डॉ. मंजीत पटेल का बयान:
“वित्त मंत्रालय ने ₹23.42 करोड़ का फंड देकर प्रक्रिया को आधिकारिक बना दिया है, यह स्वागत योग्य है। लेकिन हम सरकार से अपील करते हैं कि आयोग अब ‘मिशन मोड’ में काम करे। आयोग को अगले 200 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करके भारत सरकार को सौंपनी चाहिए। पहले ही एक साल की देरी हो चुकी है और कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे रहा है।”
उनका तर्क है कि आयोग को जल्द से जल्द दफ्तर में बैठकर डेटा विश्लेषण शुरू करना चाहिए ताकि 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक नई सिफारिशें लागू की जा सकें।
5. वेतन आयोग का इतिहास और महत्व (Wikipedia Context)
भारत में केंद्रीय वेतन आयोग (Central Pay Commission) एक ऐसी संस्था है जिसका गठन हर 10 साल में एक बार किया जाता है। इसका मुख्य कार्य केंद्र सरकार के असैनिक और सैन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा करना है। पहला वेतन आयोग 1946 में गठित किया गया था। 7वां वेतन आयोग 2014 में गठित हुआ था और इसकी सिफारिशें 2016 से लागू हुई थीं। अब 8वां वेतन आयोग 2026 के लिए तैयार है। अधिक जानकारी के लिए देखें: वेतन आयोग (Wikipedia)
6. निष्कर्ष: भविष्य का रास्ता साफ
बजट 2026 के प्रावधानों ने यह साबित कर दिया है कि 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब एक वास्तविकता है। ₹23.42 करोड़ का फंड उस इंजन के लिए ‘ईंधन’ का काम करेगा जो करोड़ों लोगों की आर्थिक स्थिति को बदलने वाली रिपोर्ट तैयार करेगा। आने वाले महीनों में फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन पर होने वाली चर्चाएं यह तय करेंगी कि 1 जनवरी 2026 (पूर्वव्यापी तिथि) से कर्मचारियों को कितना वित्तीय लाभ मिलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या बजट में मिला पैसा कर्मचारियों की बढ़ी हुई सैलरी है? उत्तर: नहीं, यह पैसा 8वें वेतन आयोग के प्रशासनिक खर्चों, कर्मचारियों के वेतन और शोध (Research) कार्यों के लिए आवंटित किया गया है।
Q2. 8वें वेतन आयोग से न्यूनतम वेतन कितना बढ़ सकता है? उत्तर: कर्मचारी संगठन न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर ₹26,000 करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय आयोग की रिपोर्ट के बाद सरकार लेगी।
Q3. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें कब से लागू होंगी? उत्तर: आमतौर पर सिफारिशें 10 साल के अंतराल पर लागू होती हैं। चूंकि 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, इसलिए 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है (एरियर के साथ)।
Q4. क्या पेंशनर्स को भी इसका लाभ मिलेगा? उत्तर: हाँ, वेतन आयोग की सिफारिशें पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन और फैमिली पेंशन पर भी लागू होती हैं।
Q5. बजट में 8वें वेतन आयोग के लिए कुल कितना फंड दिया गया है? उत्तर: सरकार ने कुल ₹23.42 करोड़ का प्रावधान किया है, जिसमें राजस्व और पूंजीगत व्यय दोनों शामिल हैं।
लेखक का परिचय
घनश्याम नामदेव शिक्षा और सरकारी नीतियों के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, घनश्याम नामदेव एक अनुभवी पत्रकार और वित्तीय विश्लेषक हैं। उन्होंने वेतन आयोगों और कर्मचारियों के अधिकारों पर कई शोधपूर्ण लेख लिखे हैं। उनकी विशेषज्ञता बजट के जटिल तकनीकी पहलुओं को आम आदमी की भाषा में समझाने में है।
अस्वीकरण (Disclaimer): www.sabkuchgyan.com पर दी गई जानकारी आधिकारिक बजट दस्तावेजों और वर्तमान समाचारों पर आधारित है। अंतिम वेतन वृद्धि और नियम भारत सरकार द्वारा अधिसूचित आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही तय होंगे।
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